*सांगली नगर में आचार्य श्रीराजरत्न सूरीश्वरजी (भगवान म.सा.)का भव्य चातुर्मास मंगल प्रवेश!*



▪️गुरुभक्तों का उमड़ा जनसैलाब, संगीत-भक्ति और वात्सल्य से सजी अनूठी धर्मयात्रा!*


दक्षिण महाराष्ट्र का गौरव, सांगली नगर में श्री जैन श्वेताम्बर अमिझरा पार्श्वनाथ देहरासर ट्रस्ट के तत्वावधान में परम पूज्य आचार्य श्री राजरत्न सूरीश्वरजी (भगवान म. सा.)आदि ठाणा 5 एवं प.पू.सा.श्री शमपूर्णाश्रीजी म.सा.आदि ठाणा 6 का चातुर्मास मंगल प्रवेश दिनांक 6 जुलाई प्रातः 8:30 बजे श्री अमिझरा पार्श्वनाथ देहरासर से भव्य प्रवेश यात्रा के साथ शुरू होकर सुनितिन जैन भवन (जेठाभाई वाड़ी) संपन्न हुआ।

प्रवेश यात्रा में समाजजन, महिला मंडल एवं देशभर से आए गुरुभक्तों ने बड़ी संख्या में भाग लिया। रास्ते में कई जगह पर गुरुदेव के स्वागत में महिलाओं द्वारा गुरु गवली कर भाववंदना की गई एवं मंगल कलश से अभिनंदन किया गया। ढोल, बैंड की थाप पर थिरकते श्रद्धालुओं के "गुरुजी अमारो" अंतरनाद" के जयकारों से सांगली नगर का आसमान गुंजायमान हो उठा।

यात्रा शहर के राजमार्ग से होते हुए सुनितिन जैन भवन पहुंची, जहाँ यह धर्मसभा में परिवर्तित हुई। सर्वप्रथम युवा संगीतकार अक्षत संघवी  ने गुरुभक्ति गीत प्रस्तुत कर वातावरण को भक्ति से सराबोर कर दिया।और जनमानस को भावविभोर कर दिया मंच संचालक महावीर भंसाली  ने सभा को नई ऊँचाई दी।

चातुर्मास प्रवेश में सैकड़ों की संख्या में श्रद्धालु उपस्थित रहे। विशेष रूप से मुंबई, पुणे, कोल्हापुर, सूरत,मिरज, जयसिंगपुर, तथा आसपास के क्षेत्रों से अनेक श्रद्धालु उपस्थित हुए।कांबली चढ़ावे का लाभ: संघवी प्रकाशचंद जी रिखबचंदजी जैन पूना और

गुरुपूजन का लाभ: प्रितम भाई परिवार कोल्हापुर 

पाप परिहार ग्रंथ वोहराने का लाभ: वसंतलाल एम शाह परिवार ने लिया।

धर्मसभा में पूज्य आचार्य श्री ने मंगलाचरण के श्रवण के साथ सभी भक्तों से आह्वान किया कि वे इस चातुर्मास काल में आत्म-उत्थान व पुण्यार्जन का अवसर न चूकें।

 "चातुर्मास के ये चार महीने आत्मा की ओर लौटने का अनुपम अवसर है। केवल गुरुदेव को विराजित कर देना पर्याप्त नहीं, बल्कि उनके सान्निध्य में धर्म आराधना ही सच्चा लाभ है।"

श्री संघ के अध्यक्ष एवं ट्रस्ट मंडल ने  लाभार्थियों एवं आगंतुकों का स्वागत करते हुए गुरुदेव के प्रति कृतज्ञता व्यक्त की।

कार्यक्रम की शुरुआत पाठशाला के बालक-बालिकाओं के भावनृत्य से हुई, जिसने सभी को अभिभूत कर दिया। धर्मसभा उपरांत संघ स्वामी वात्सल्य  का आयोजन किया गया। जिसका लाभ मातोश्री सविता बेन डोसालाल मकिम परिवार ने लिया

संक्षेप में, सांगली की पुण्यधरा आज गुरुप्रेम, श्रद्धा और धर्म आराधना की एक अमिट मिसाल बन गई – एक ऐसा ऐतिहासिक दिवस रचा गया जो वर्षों तक हृदयों में स्मरणीय रहेगा।


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