*आचार्य यशोवर्मसूरीश्वरजी का चातुर्मास पहली बार नवी मुंबई में, प्रवेश यात्रा को ऐतिहासिक बनाने की तैयारियाँ जोरों पर*
*नवी मुंबई, वाशी* – जैन समाज के लिए इस वर्ष का चातुर्मास नवी मुंबई वासियों के लिए विशेष गौरव का विषय बन गया है। पूज्यपाद आचार्य भगवंत श्रीमद् विजय यशोवर्मसूरीश्वरजी महाराज साहेब पहली बार नवी मुंबई में चातुर्मास हेतु पधारे हैं। जैसे ही यह शुभ समाचार मिला, समूचे जैन समाज में हर्ष की लहर दौड़ गई।
चातुर्मास की पूर्व संध्या पर आयोजित प्रवेश यात्रा को ऐतिहासिक और भव्य बनाने के लिए समाजजन विशेष रूप से सक्रिय हो उठे हैं। 7 जुलाई को होने वाली इस यात्रा की तैयारियाँ बड़े जोश और उत्साह के साथ की जा रही हैं। आयोजन की थीम को आकर्षक बनाने के लिए बच्चे, युवा और वरिष्ठजन तन-मन-धन से जुटे हैं।
प्रवेश यात्रा में देशभर के विभिन्न क्षेत्रों से साधु-साध्वियों, श्रद्धालुजनों, प्रमुख संघों और गणमान्य अतिथियों के पहुंचने की संभावना है। समाज की ओर से व्यवस्था और स्वागत सत्कार की तैयारियाँ पूरे जोरों पर चल रही हैं।
इस अवसर पर पूज्य गुरुदेव की वाणी से मिले संदेश ने उपस्थित श्रावक-श्राविकाओं को गहराई से छू लिया। गुरुदेव ने कहा की संबंधों के बीच की दूरी जल्दी मिट सकती है, अगर हमारा अहम हमारी मजबूरी न हो।
उन्होंने कहा कि मीठे बोलने से कोई नुकसान नहीं होता और कड़वे बोलने से कुछ भी प्राप्त नहीं होता, लेकिन फिर भी हमारी जीभ अक्सर नियंत्रण से बाहर रहती है। इसका मूल कारण है अहंकार, जो बिना वजह भी रिश्तों को तोड़ देता है। जैन दर्शन में अहंकार को क्रोध से भी अधिक खतरनाक बताया गया है।
आचार्य भगवंत के चातुर्मास के दौरान प्रत्येक सुबह 8:30 बजे प्रवचन का आयोजन किया जाएगा, जिसमें बड़ी संख्या में श्रद्धालु जन लाभ उठाएंगे। यह चातुर्मास नवी मुंबई के इतिहास में भक्ति, संयम और सेवा के नए आयाम स्थापित करेगा ऐसा विश्वास सभी समाजजनों ने व्यक्त किया है।


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