चतुर्थ राष्ट्रीय प्राकृत संगोष्ठी 3-5 अक्टूबर को आगरा में
पूर्व संगोष्ठी में प्रतिभागी डॉ. धींग, डॉ. धर्मचंदजी, डॉ. अनेकांतजी और निदेशक डॉ. जितेन्द्रजी
आगरा।
बहुश्रुत जयमुनि के सानिध्य में चतुर्थ राष्ट्रीय प्राकृत संगोष्ठी 3 से 5 अक्टूबर तक आगरा (उत्तर प्रदेश) में होगी। श्रुत रत्नाकर, अहमदाबाद द्वारा आयोजित इस तीन दिवसीय संगोष्ठी में दक्षिण भारत से साहित्यकार डॉ. दिलीप धींग भाग लेंगे। अभुषा फाउंडेशन के शोध-प्रमुख डॉ. धींग प्राकृत भाषा के प्राचीन आगम स्थानांग सूत्र पर अपना शोधपत्र प्रस्तुत करेंगे और व्याख्यान देंगे।
ढाई हजार साल पुराने आगम स्थानांग सूत्र में प्राचीन भारत की ज्ञान संपदा का अखूट खजाना भरा है। इस आगम शास्त्र में तत्वज्ञान, इतिहास, गणित, खगोल, भूगोल, आचार, मनोविज्ञान, संगीत, आयुर्वेद आदि 1200 से अधिक विषय हैं। विषयों की व्याख्या अनेकांत दृष्टि से की गई है।
निदेशक डॉ. जितेन्द्र बी. शाह ने बताया कि इस संगोष्ठी शृंखला की शुरुआत गुरु सुदर्शन जन्म शताब्दी में, अक्टूबर-2022 में रोहतक (हरियाणा) में हुई थी। उसी संगोष्ठी में कवि डॉ. धींग ने प्राकृत को शास्त्रीय (क्लासिकल) भाषा की मान्यता प्राप्त करने का सुझाव दिया था। समाज और विद्वानों की मांग पर अक्टूबर-2024 में भारत सरकार ने प्राकृत सहित पाँच भाषाओं को शास्त्रीय भाषा का दर्जा प्रदान किया।


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