हम भूल गये :- दिनेश दोशी चेन्नई
_तेरे हुस्न का जलवा देख,_
_सारे जलवे हम भूल गए_
_तेरी शोख अदाओं से,_
_सारी अदाएं हम भूल गए._
_तेरे सूरत का दीदार पाकर,_
_अपना चेहरा हम भूल गए_
_तेरी मोरनी सी चाल देख,_
_अपने कदम हम भूल गए_
_तेरी झील सी आँखें देख,_
_कश्मीर को हम भूल गए._
_तेरे बदन की खुश्बू से,_
_कन्नौज को हम भूल गए._
_तेरे चेहरे के कोहिनूर से,_
_सूरज को हम भूल गए._
_तेरी मीठी बोली सुनकर,_
_कोयल को हम भूल गए._
_तेरे दिलकश नगमे सुनकर,_
_तानसेन को हम भूल गए._
_तेरे भक्तिभजन सुनकर,_
_मीराबाई को हम भूल गए._
_तेरे प्रेम को महसूस कर,_
_राधा-कृष्ण हम भूल गए._
_तेरी कमसिन काया देख,_
_जहां आलम हम भूल गए._
_तेरे रूप,रंग,लावण्य में,_
_सारे नज़ारे हम भूल गए._
_मर गए तेरी खासियतों पर,_
_मरने का गम हम भूल गए._
_✒️दिनेश दोशी_

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