अशोक दोशी की कविता

 दिनांक 23/6/2025

विषय: संगीत

रूप घनाक्षरी 


हो जीवन में संगीत 

    राग से रखना प्रीत 

       पढ़ना साहित्य नित

          गाते रहे गीत गान।१।


  रहे गायन सात्वीक 

     अभिप्राय हो मार्मिक 

       देगा सुख मानसिक 

         हो गीत का रस पान ।२।


करें रोगों का निदान 

    लगा गीत में  वो ध्यान 

       गायें इसे कृष्ण कान

         बढ़े आकर्षण शान।३।


आज कल के ये गीत,

     कान फोड़ू वो संगीत,

         नहीं करें कोई हित,

           संस्कृति का घटा मान।४।




स्वरचित:अशोक दोशी

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