चित्रलेखा फिल्म की धुन पर नैनमलजी द्वारा रचित स्तवन

 कुछ दिन पूर्व FB पर नैनमलजी ने

एक post पढ़ी थी, जिससे उन्हे ज्ञात हुआ कि हिंदी फिल्म संगीत के १०० सालमें  सर्व श्रेष्ठ गीत, " मन रे तु काहे न धीर धरे" है।

यह गीत चित्रलेखा फिल्म के लिए साहिर लुधियानवी ने लिखा, महोमद रफी ने गाया और संगीत रोशन ने दिया था। इसी गीत की तर्ज वो नैनमल जी द्वारा स्वरचित स्तवन साझा कर रहा हूं।

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(तर्ज : मन रे तू कहे ना धीर धरे )

भव से श्री पारस पार करें,

हैं आंखें करुणा के प्याले,

मन के पाप हरें,

भवसे

मन मंदिर में प्रभु किरपा से,

दूर हुआ अंधियारा,

श्रद्धा दीप जला जीवन में,

हुआ अजब उजियारा,

भव भव के भय विसरे,

भव से

प्रभु के है उपकार अनेकों,

पार कोई ना पाए,

सुमिरन सुखकर है प्रभुका

बिरला ध्यान लगाए,

नैन में नीर भरे,

भव से


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