नवकार महामंत्र की नव चेतना से गूंज उठा विश्व: प्रधानमंत्री मोदी ने JITO के मंच से दिया 9 संकल्पों का संदेश
9 अप्रैल 2025 को विज्ञान भवन, दिल्ली में एक ऐसा आध्यात्मिक दृश्य देखने को मिला, जिसने करोड़ों दिलों को छू लिया। अवसर था JITO (Jain International Trade Organisation) द्वारा आयोजित ‘नवकार महामंत्र दिवस’ का। देश और विदेश के 108 देशों में एक साथ यह आयोजन हुआ, जिसमें भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने अपने विशेष उद्बोधन से इस पवित्र दिवस को और भी ऐतिहासिक बना दिया।
संयोग कुछ ऐसा था जैसे ब्रह्मांड स्वयं इस दिन को खास बनाने के लिए तैयार था। तारीख थी 9 अप्रैल, और 2025 का कुल अंक जोड़ भी 9 आता है। कार्यक्रम की शुरुआत सुबह 8:01 बजे हुई — 8+0+1 यानी 9। समापन हुआ 9:36 बजे — 9+3+6 = 18, जिसका भी जोड़ 9 होता है। कार्यक्रम की कुल अवधि रही 1 घंटा 35 मिनट, यानी 1+3+5 = 9। ये सब कुछ ऐसा प्रतीत हो रहा था मानो नवकार मंत्र का 'नव' (9) हर पल, हर सांस में समाया हुआ हो।
और तो और, आयोजन जैन धर्म के 9 पद ओली पर्व के दौरान आयोजित किया गया, जिसमें संयम, उपवास और आत्मशुद्धि की साधना होती है। नवकार मंत्र की 9 पंक्तियाँ, 108 देशों की भागीदारी (1+0+8 = 9), और प्रधानमंत्री मोदी के दिए 9 संकल्प — यह सब मिलकर इस आयोजन को एक दिव्य संयोग का प्रतीक बना देते हैं।
अपने संबोधन में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने नवकार मंत्र को केवल एक धार्मिक मंत्र नहीं, बल्कि मानवता की आत्मा से जुड़ा विश्वमंत्र बताया। उन्होंने कहा कि यह मंत्र व्यक्ति को भीतर से स्थिर करता है, और बाहर की दुनिया को शांति की ओर प्रेरित करता है। अपने प्रेरक संदेश में उन्होंने देशवासियों को 9 संकल्पों को अपनाने का आग्रह किया — जिसमें जल संरक्षण, स्वच्छता, प्राकृतिक खेती, हेल्दी लाइफस्टाइल, योग, सेवा, देशभक्ति और आत्मचिंतन जैसे मूल्य शामिल थे। उनका कहना था कि अगर हर भारतवासी इन संकल्पों को जीवन में उतार ले, तो भारत ही नहीं, पूरी दुनिया एक नई दिशा की ओर बढ़ेगी।
JITO ने इस आयोजन को एक आध्यात्मिक समारोह तक सीमित नहीं रखा, बल्कि इसे सेवा, समर्पण और समाज कल्याण के आंदोलन में बदल दिया। देशभर में सामूहिक नवकार जाप, रक्तदान शिविर, पर्यावरण संरक्षण अभियान और महिलाओं व युवाओं की प्रेरक भागीदारी ने यह साबित कर दिया कि नवकार सिर्फ मंत्र नहीं, बल्कि एक मिशन है।
इस दिन विज्ञान भवन में केवल मंत्र नहीं गूंजे, बल्कि एक नव चेतना का जन्म हुआ। जब हर कोने में 9 की ध्वनि सुनाई दी — चाहे वह मंत्र की पंक्तियों में हो, संकल्पों में हो, समय में हो या भागीदारी के देशों की संख्या में — तब ऐसा लगा कि ब्रह्मांड स्वयं इस संदेश को ग्रहण कर रहा है।
इस आयोजन ने न केवल जैन समाज की सांस्कृतिक और आध्यात्मिक शक्ति को उजागर किया, बल्कि यह भी दिखा दिया कि जब धर्म, राष्ट्र और समाज एक दिशा में चलें तो नवकार के शब्दों से नव भारत और नव विश्व का निर्माण संभव है।
प्रधानमंत्री मोदी के उद्बोधन को देश विदेश के कार्यक्रम स्थलों पर सीधा प्रसारण किया गया।



टिप्पणियाँ
एक टिप्पणी भेजें