भारत में पहली हाइड्रोजन ट्रेन का सफल ट्रायल, स्वच्छ ऊर्जा की दिशा में ऐतिहासिक कदम

 

नई दिल्ली। भारतीय रेलवे ने स्वच्छ ऊर्जा और पर्यावरण संरक्षण की दिशा में एक बड़ा कदम उठाते हुए देश की पहली हाइड्रोजन ट्रेन का सफल परीक्षण किया है। यह ऐतिहासिक ट्रायल 31 मार्च 2025 को हरियाणा के जींद-सोनीपत मार्ग पर किया गया। चेन्नई स्थित इंटीग्रल कोच फैक्ट्री (ICF) द्वारा निर्मित इस ट्रेन का सबसे बड़ा आकर्षण इसका हाइड्रोजन फ्यूल सेल आधारित इंजन है, जो इसे शून्य कार्बन उत्सर्जन वाली तकनीक बनाता है। इस ट्रेन ने ट्रायल रन के दौरान 110 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार प्राप्त की और पूरी तरह से पर्यावरण अनुकूल साबित हुई। रेलवे अधिकारियों के अनुसार, यह ट्रेन एक बार चार्ज होने के बाद लंबी दूरी तय कर सकती है और इसमें एक समय में 2,638 यात्री सफर कर सकते हैं। हाइड्रोजन ईंधन के इस्तेमाल से यह न केवल ध्वनि और वायु प्रदूषण को खत्म करेगी, बल्कि इसकी परिचालन लागत भी पारंपरिक ट्रेनों की तुलना में 70% तक कम होगी।

ट्रायल रन के दौरान कुछ तकनीकी चुनौतियाँ भी सामने आईं, जिनके समाधान पर रेलवे के विशेषज्ञ काम कर रहे हैं। इससे पहले इसे दिसंबर 2024 में कालका-शिमला मार्ग पर लॉन्च करने की योजना थी, लेकिन अब इसके 2025 के मध्य तक शुरू होने की संभावना जताई जा रही है। रेलवे सूत्रों के अनुसार, हाइड्रोजन फ्यूल स्टोरेज और इंजन ऑप्टिमाइजेशन से जुड़ी कुछ समस्याओं को दूर करने के लिए अतिरिक्त परीक्षण किए जा रहे हैं। भारतीय रेलवे ने इस परियोजना के लिए ₹2,800 करोड़ का बजट निर्धारित किया है, जिसके तहत 35 हाइड्रोजन ट्रेनों का निर्माण किया जाएगा। सरकार का लक्ष्य 2030 तक भारतीय रेलवे को पूरी तरह ‘नेट जीरो कार्बन उत्सर्जन’ प्रणाली में बदलना है, जिससे हर साल 11.2 लाख टन कार्बन उत्सर्जन में कमी आएगी।

भारत अब उन चुनिंदा देशों में शामिल हो गया है जिन्होंने हाइड्रोजन ट्रेन तकनीक को अपनाया है। इससे पहले जर्मनी, चीन और फ्रांस ने इस तकनीक को सफलतापूर्वक लागू किया है। भारतीय रेलवे का यह प्रयास न केवल देश में हरित परिवहन को बढ़ावा देगा, बल्कि भारत को ग्रीन टेक्नोलॉजी के क्षेत्र में वैश्विक मंच पर एक नई पहचान भी दिलाएगा। रेलवे मंत्रालय के अनुसार, यदि यह परियोजना सफल रहती है, तो आने वाले वर्षों में विभिन्न रेलवे मार्गों पर और अधिक हाइड्रोजन ट्रेनों को शामिल किया जाएगा, जिससे भारतीय रेलवे को पूरी तरह से आधुनिक और पर्यावरण-मित्र बनाया जा सकेगा।



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