गिरधर नगर जैन संघ में पूज्य पन्यास श्री शीलचंद्र विजयजी म.सा. की निश्रा में चैत्र मास की नवपद ओली आराधना संपन्न
श्रद्धा, सेवा और समर्पण की अनुपम मिसाल
अहमदाबाद शाहीबाग, 13 अप्रैल 2025, रविवार
गिरधर नगर जैन संघ में चैत्र मास की नवपद ओली इस बार केवल एक धार्मिक अनुष्ठान नहीं रही, बल्कि श्रद्धा, सेवा और समर्पण की ऐसी मिसाल बन गई, जिसे वर्षों तक याद किया जाएगा।
परम पूज्य आचार्य भगवंत श्री रामसूरीजी डहेलावाला समुदाय के परम विनयी शिष्य, पूज्य आचार्य देव श्री जगतचंद्र सूरीजी म.सा. के परम शिष्य रत्न, पूज्य पन्यास श्री शीलचंद्र विजयजी म.सा. की प्रेरणा से आयोजित इस ओली में संघ के श्रद्धालुजनों ने पूरे नौ दिन तक भक्ति और अनुशासन के साथ नवपद की आराधना की।
इस आराधना को करवाने का पुण्य लाभ स्व. नेमीचंदजी मुलतानमलजी बागरेचा परिवार को प्राप्त हुआ। मातुश्री रुक्मणि देवी की प्रेरणा से उत्तमचंद, रमेशचंद्र, सुजल, रोहन, शशांक, रौनक, यश, नेमिश, पार्श्व सहित पूरे परिवार की सभी श्राविकाओं ने मिलकर अत्यंत श्रद्धा से आराधकों के लिए आयंबिल की उत्तम व्यवस्था की। संघ के सभी श्रावक-श्राविकाओं ने अपने हाथों से सात्विक आयंबिल भोजन को प्रेम और समर्पण के साथ परोसा। हर थाली में सेवा का भाव और हर मुस्कान में अपनापन झलक रहा था।
जब ओली का पारणा हुआ, उस दिन संघ की ओर से लाभार्थी परिवार का बड़े सम्मान और आदर के साथ तिलक, माला, श्रीफल और स्मृति चिन्ह देकर बहुमान किया गया। यह क्षण हर हृदय को छू गया क्योंकि इसमें केवल सम्मान नहीं था, बल्कि एक परिवार की निःस्वार्थ सेवा को सच्चा प्रणाम था।
पूज्य गुरुदेव की प्रेरणा और संघ की एकजुटता ने इस आयोजन को यादगार बना दिया। यह आयोजन पूज्य पन्यास श्री शीलचंद्र विजयजी म.सा. के आशीर्वाद से सम्पन्न हुआ, जो निश्चित ही पूरे जैन समाज के लिए एक प्रेरणा बनेगा।
अंत में गुरु भगवंत ने श्री संघ को प्रेरणा दी कि जब भी श्री संघ में स्वामी वात्सल्य हो या कोई तप आराधना हो तो संघ के श्रावक-श्राविकाएं इसी तरह प्रेम व समर्पण के साथ परोसने का कार्य करें। इसके लिए इच्छुक श्रावक-श्राविकाओं के ग्रुप बनाकर जोड़ने की बात कही, जो ऐसे आयोजनों में अपनी सेवाएं दे सकें।
इस संपूर्ण आयोजन में एक विशेष क्षण 11 अप्रैल को आया, जब असरवा-शाहीबाग क्षेत्र की लोकप्रिय विधायक श्रीमती दर्शना बेन और अहमदाबाद की मेयर श्रीमती प्रतिभा बहन ने अपनी गरिमामयी उपस्थिति दर्ज करवाकर, स्वयं सात्विक भोजन परोसने की सेवा देकर संघ को गौरवान्वित किया।
ऐसे आयोजनों से समाज में सेवा, समर्पण और सामूहिकता का जो दीप जलता है, वह न केवल वर्तमान को आलोकित करता है, अपितु आने वाली पीढ़ियों को भी सच्चे धर्म की राह दिखाता है।



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