अब रामेश्वरम जाना हुआ और भी आसान – पीएम मोदी ने दिए 28 नई ट्रेनों के तोहफे

 

6 अप्रैल 2025 को देश में एक नया इतिहास बना। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने रामेश्वरम को जोड़ने वाले देश के पहले वर्टिकल लिफ्ट ब्रिज यानी उठने वाले समुद्री पुल का उद्घाटन किया। ये नया पंबन ब्रिज अब सिर्फ इंजीनियरिंग का कमाल नहीं है, बल्कि रामभक्तों और श्रद्धालुओं के लिए एक वरदान साबित हो रहा है।

इस मौके पर पीएम मोदी ने 11 बड़े शहरों से रामेश्वरम के लिए 28 नई ट्रेनों की घोषणा भी की। अयोध्या, वाराणसी, भुवनेश्वर, भोपाल, इंदौर, नागपुर, पुणे, जयपुर, रांची, पटना और हावड़ा जैसे शहरों से अब सीधे रामेश्वरम पहुंचा जा सकेगा। अब रामेश्वरम जाने के लिए लंबा प्लान बनाना या बार-बार ट्रेन बदलने की जरूरत नहीं पड़ेगी।

तांबरम से रामेश्वरम के बीच रोज चलने वाली ट्रेन भी शुरू की जा रही है, जो शाम को रवाना होकर सुबह तक पहुंचा देगी। साथ ही मंगलुरु से रामेश्वरम और थूथुकुडी से मेट्टुपालयम के बीच भी नई ट्रेनें शुरू होंगी।

ये नई पहल न सिर्फ यात्रा को आसान बनाएगी, बल्कि रामेश्वरम को देश के हर कोने से जोड़ देगी। आस्था की इस डोर को अब रेलवे और मजबूती से पकड़ रहा है। अब रामेश्वरम की यात्रा सिर्फ सपनों में नहीं, सीधे टिकट पर मुमकिन होगी। यह पुल और नई ट्रेनें देश की संस्कृति और तकनीक का शानदार मेल हैं  एक ओर श्रद्धा, तो दूसरी ओर आधुनिकता।

अब राम का नाम लो और सीधा ट्रेन पकड़ो , रामेश्वरम अब है पहले से और करीब!



टिप्पणियाँ

इस ब्लॉग से लोकप्रिय पोस्ट

अहमदाबाद में श्रीमती जेठीदेवी संकलेचा का निधन, नेत्रदान कर बनीं समाज के लिए प्रेरणा

नाहटा परिवार द्वारा आयोजित "रिषभ राज संघोत्सव" का शुभ मुहूर्त प्रदान

कर्णावती यूनिवर्सिटी में गढ़सिवाना की योगिता (देविका) जैन को गोल्ड मेडल

तेरापंथ युवक परिषद, अहमदाबाद की वार्षिक सभा हुई सम्पन्न,प्रदीप बागरेचा बने नए अध्यक्ष

भाव अशुभ शुभ हो पहले POETRY

मिलावट के खिलाफ जागरूकता की जरूरत :- अशोक बाफना

अग्रवाल समाज का ऐतिहासिक प्रोजेक्ट: मदुरै स्थित तथनेरी देवभूमि (श्मशान गृह) में वेटिंग हॉल का उद्घाटन 10 मार्च को

राजभवन में हुआ PYS का 212वां सेशन — आचार्य श्री उदय वल्लभ सूरिश्वरजी म.सा. ने दी “ब्लैक बॉक्स” के ज़रिए खुद को समझने की सीख

पत्नी की याद में समर्पण की मिसाल: चूरू के व्यापारी निर्मल सेठिया ने यूके में रचा इतिहास

धर्म जड़ नहीं, एक प्रवाह है- आचार्य श्री उदय वल्लभ सूरीजी म.सा. का गिरधर नगर में प्रेरणादायक प्रवचन