'तारक मेहता का उल्टा चश्मा' के हंसी के पीछे छिपे विवादों की कहानी 'TARAK MEHTA KA ULTA CHASMA'
भारतीय टेलीविजन के सबसे लोकप्रिय और लंबे समय तक चलने वाले शोज़ में ‘तारक मेहता का उल्टा चश्मा’ ने अपनी एक अलग पहचान बनाई है। 2008 में शुरू हुए इस शो ने हर उम्र के दर्शकों के दिलों में अपनी खास जगह बनाई है। पारिवारिक हास्य, सामाजिक संदेश और गोकुलधाम सोसाइटी के अनोखे किरदारों ने इसे घर-घर में लोकप्रिय बना दिया। ‘सीआईडी’ और ‘कौन बनेगा करोड़पति’ की तरह ही इस शो ने भारतीय टेलीविजन पर अपनी अमिट छाप छोड़ी है। लेकिन जहाँ एक ओर यह शो हंसी और मनोरंजन के लिए जाना जाता है, वहीं दूसरी ओर कलाकारों की विदाई, विवाद और प्रोडक्शन हाउस पर लगे गंभीर आरोपों ने इसकी छवि को कई बार धूमिल किया है।
शो में सबसे चर्चित विदाई ‘दया बेन’ का किरदार निभाने वाली दिशा वकानी की रही। 2017 में मातृत्व अवकाश पर जाने के बाद उन्होंने शो में वापसी नहीं की। दिशा की वापसी को लेकर कई बार अटकलें लगीं, लेकिन प्रोडक्शन हाउस और उनके बीच शर्तों पर सहमति नहीं बन पाई। उनके न लौटने से दर्शकों को गहरा झटका लगा, क्योंकि उनकी अनोखी संवाद अदायगी और किरदार की मासूमियत शो की जान थी। इसी तरह, शो के मुख्य किरदार 'तारक मेहता' को निभाने वाले शैलेश लोढ़ा ने भी 2022 में शो को छोड़ दिया। उन्होंने प्रोडक्शन हाउस पर बकाया भुगतान न करने का आरोप लगाते हुए कानूनी कार्यवाही की थी। उनके जाने के बाद सचिन श्रॉफ को लाया गया, लेकिन शैलेश लोढ़ा की लोकप्रियता की कमी को पूरा करना मुश्किल साबित हुआ।
‘अंजलि भाभी’ का किरदार निभाने वाली नेहा मेहता ने भी 2020 में शो छोड़ दिया। उन्होंने प्रोडक्शन हाउस पर अनुचित व्यवहार और भुगतान न करने के आरोप लगाए। उनकी जगह सुनयना फौजदार को लाया गया, लेकिन नेहा की जगह दर्शकों के दिलों में कोई नहीं ले पाया। शो में ‘हाथी भाई’ का किरदार निभाने वाले कवि कुमार आजाद की 2018 में अचानक मृत्यु ने पूरे शो की टीम को झकझोर दिया। उनके स्थान पर नितीश भलूनी आए, लेकिन दर्शकों को आज भी कवि कुमार आज़ाद की याद आती है। इसी तरह, ‘नट्टू काका’ का किरदार निभाने वाले घनश्याम नायक की 2021 में कैंसर के कारण मृत्यु हो गई। उनकी जगह किरण भट्ट को लाया गया, लेकिन दर्शकों के दिलों में आज भी घनश्याम नायक की जगह कोई नहीं ले पाया।
‘टप्पू’ का किरदार निभाने वाले भव्या गांधी ने 2017 में अपने फिल्मी करियर को आगे बढ़ाने के लिए शो छोड़ दिया। उनकी जगह राज अनादकट आए, लेकिन उन्होंने भी 2022 में शो छोड़ दिया। ‘बावरी’ का किरदार निभाने वाली मोनिका भदौरिया ने 2019 में शो छोड़ा और प्रोडक्शन हाउस पर मानसिक शोषण और भुगतान न करने के गंभीर आरोप लगाए। शो में 2023 में एक और बड़ा विवाद तब सामने आया जब ‘मिसेज़ रोशन सोढ़ी’ का किरदार निभाने वाली जेनिफर मिस्त्री बंसीवाल ने शो के निर्माता असित कुमार मोदी पर यौन उत्पीड़न के गंभीर आरोप लगाए। इस आरोप ने शो की साफ-सुथरी छवि को गहरा झटका दिया।
पोपटलाल, अय्यर और बबिता जैसे किरदार भी कई बार विवादों में रहे हैं। ‘पोपटलाल’ का किरदार निभाने वाले श्याम पाठक के बारे में खबरें आईं कि सेट पर अनुशासनहीनता के कारण उन्हें शो से बाहर कर दिया जाएगा, लेकिन मामला सुलझने के बाद वह लौट आए। ‘बबिता जी’ की भूमिका निभाने वाली मुनमुन दत्ता 2021 में अपने एक विवादास्पद बयान के कारण कानूनी पचड़े में फंसी थीं। हालांकि उन्होंने बाद में माफी मांगकर मामले को शांत कर दिया। ‘अय्यर’ का किरदार निभाने वाले तनुज महाशब्दे को भी उनके किरदार को लेकर कई बार ट्रोल किया गया, लेकिन उन्होंने इन आलोचनाओं की परवाह न करते हुए शो में अपनी जगह बनाए रखी।
‘तारक मेहता का उल्टा चश्मा’ ने ‘सीआईडी’ की तरह लंबे समय तक अपनी पकड़ बनाए रखी है। जहाँ ‘सीआईडी’ का ‘कुछ तो गड़बड़ है’ डायलॉग दर्शकों के बीच प्रसिद्ध हुआ, वहीं ‘कौन बनेगा करोड़पति’ में अमिताभ बच्चन की संवाद शैली और उनका करिश्मा दर्शकों को आज भी खींचता है। इसी तरह, ‘तारक मेहता का उल्टा चश्मा’ में ‘टप्पू सेना’ की मासूमियत और दया बेन की 'हे मां! माताजी' वाली अदा ने इसे भारतीय टेलीविजन की पहचान बना दिया।
हालांकि, इन वर्षों में लगातार कलाकारों के जाने और प्रोडक्शन हाउस पर लगे आरोपों ने इस शो की चमक को कम कर दिया है। फिर भी, यह शो आज भी भारतीय टेलीविजन पर अपनी मजबूत पकड़ बनाए हुए है। दर्शक आज भी अपने चहेते पुराने कलाकारों की वापसी का इंतजार कर रहे हैं। यह कहना गलत नहीं होगा कि ‘तारक मेहता का उल्टा चश्मा’ भारतीय टेलीविजन का एक ऐसा शो है, जिसने हंसी और मनोरंजन के जरिए एक पीढ़ी को जोड़ा है, लेकिन पर्दे के पीछे कई ऐसी कहानियाँ छुपी हैं, जिनका असर इस शो की छवि पर पड़ा है।

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