जालोर को कब मिलेगी सीधी रेल सेवा? इस बार मांग पूरी होगी या फिर हवा में गुम हो जाएगी?
राजस्थान का जालोर जिला रेल सुविधाओं के मामले में वर्षों से उपेक्षित है। समदड़ी-भीलड़ी रेल खंड पर यात्री ट्रेन चलाने की मांग 20 सालों से की जा रही है, लेकिन हर बार सिर्फ आश्वासन ही मिला। दक्षिण भारत में बसे हजारों प्रवासी राजस्थानी अपने गृह जिले से सीधी ट्रेन कनेक्टिविटी की राह देख रहे हैं, मगर सरकारों के लिए यह मुद्दा प्राथमिकता नहीं बन पा रहा। क्या जालोर की जनता सिर्फ वोट बैंक बनकर रह गई है?
20 मार्च 2025 को जब रेल मंत्री चेन्नई आए, तो जालोरवासियों ने भव्य स्वागत किया, उम्मीद थी कि इस बार कोई ठोस निर्णय होगा। मंत्रीजी ने आश्वासन दिया था कि 15-20 दिनों में दक्षिण भारत के लिए ट्रेन सेवा शुरू हो जाएगी। लेकिन सवाल यह है कि क्या यह वादा सच में पूरा होगा या फिर पिछली बार की तरह हवा में गुम हो जाएगा?
समदड़ी-भीलड़ी रेल मार्ग पर मालगाड़ियों का संचालन तो होता है, लेकिन जब यात्री ट्रेनों की बात आती है, तो सरकारें आंखें मूंद लेती हैं। आखिर क्यों? क्या जालोर की जनता का हक नहीं कि उसे भी रेल सुविधाएं मिलें? जब देशभर में नए रेल मार्ग विकसित किए जा सकते हैं, तो जालोर को बार-बार नजरअंदाज क्यों किया जाता है?
जालोर से बेंगलुरु, हैदराबाद, कोयंबटूर, दिल्ली, चेन्नई, जयपुर, बाड़मेर, विशाखापत्तनम और कोलकाता तक सीधी रेल सेवा की मांग वर्षों से की जा रही है। लेकिन यह मांग पूरी करना सरकार के एजेंडे में ही नहीं दिखता। अब तो डबल इंजन सरकार भी है, फिर भी कोई ठोस कदम क्यों नहीं उठाया गया? या फिर सिर्फ चुनावी जुमलों और खोखले वादों से जनता को बहलाने की राजनीति जारी रहेगी?
इस बार जालोर की जनता फिर से सिर्फ आश्वासन पाएगी या सच में मांग पूरी होगी? क्या सरकार जनता की आवाज सुनेगी, या फिर पिछली बार की तरह वादों की फाइलें हवा में गुम हो जाएंगी?
जालोरवासियों, अब जागो! सिर्फ स्वागत, सम्मान और ज्ञापन देने से कुछ नहीं होगा। अब समय है मजबूत जन आंदोलन का। सोशल मीडिया, समाचार पत्रों और संगठित प्रयासों के जरिए सरकार पर दबाव बनाना होगा। हमें सिर्फ आश्वासन नहीं, बल्कि अपने हक की सीधी रेल सेवा चाहिए! जालोर की जनता "पलक पांवड़े बिछाने" के लिए नहीं, बल्कि अपने अधिकारों के लिए लड़ने को तैयार है!


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