नारी में नारायणी - KAVI CHHAGANLAL MUTHA SANDERAO MUMBAI
नारी में नारायणी
नारी में नारायणी, करो नारी का सम्मान ।
माँ ने हमें जन्म दिया, उसका रखो मान ।
पाल पोस कर बड़ा किया, दिये अच्छे संस्कार ।
उस माँ के आशीर्वाद से ही, ? होता है कल्याण ।
नारी तेरे कितने नाम, जैसा नाम वैसा ही काम ।
बहन - बुआ, ननद-भाभी, काकी - मामी, चाची मासी,
माँ और सासु, देवरानी-जेठानी ।
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हर रिश्ते का अलग रूप पर, हर रिश्ते का फ़र्ज़ निभाती ।
महालक्ष्मी माँ सरस्वती, जगत जननी अम्बे भवानी ।
गंगा है नारी, जमना है नारी, सरस्वती नर्मदा में नारी ।
हर आदमी की कामयाबी नारी, नहीं कभी वो हिम्मत हारी,
क़दम से क़दम मिला के चली वो, आज हर ओहदे पर हैं नारी ।
जीवन भर साथ निभाए नारी, घर संसार संवारे नारी ।
अंत समय तक जो सेवा करती, वो पत्नी, बहु-बेटी हैं नारी ।
नहीं करो अपमान नारी का, जो जग में सबसे महान ।
नारी में नारायणी मुथा, करो सभी नारी का सम्मान ।
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कवि छगनलाल मुथा - सान्डेराव
मुम्बई


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