आदिनाथ भगवान स्तवन (तर्ज: तेरा साथ है कितना प्यारा) नैनमलजी जैन चेन्नई
नैनमलजी जैन चेन्नई
युगादिकालके प्रथम राजेश्वर, प्रथम संयमधर और प्रथम तीर्थंकर श्री
ऋषभदेव भगवानका आज
जन्म कल्याणक एवं दीक्षा
कल्याणक हैं अतः प्रभुजी
के श्री चरणों में भाव
पुष्प समर्पित हैं।
(तर्ज: तेरा साथ है कितना प्यारा)
आदिनाथ हैं प्राणसे प्यारा,
भविजनकी आंखोंका तारा,
लगी प्रभुसे लगन है,
जिनराज की दयाका,
कोई नहीं किनारा,
ध्यान प्रभुवरका धरने को,
कम लगता है जीवन सारा,
आदिनाथ
दादाके उपकार का,
कैसे हो बखान,
प्राणोंका आधार वो,
मेरूसे महान,
वो खिवैया, वो ही नैया,
भवजल तारणहारा,
जिनराज -१.
किरपा मांगें नाथकी,
आणाका खुमार,
दादाके दरबार है
बारहों मास बहार,
अभय बनाता,
शिव सुख दाता,
राहों का उजियारा,
जिनराज -२.
भोर जिन गुणगान से,
अपनी शाम ढले,
नाम ले जिनराज का
अपनी सांस चले,
साथ नाथ का,
पाथ नाथ का,
दुर्लभ नैन नजारा,
जिनराज -३.


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