संस्कृति, साहित्य और प्रेम की भाषा – हिंदी:- दिनेश दोशी
_शब्दों के समृद्ध पर्याय से बनते, निराले काव्य गान है_
_काव्य,कहानी,लेखों में,इसकी अद्भुत शक्ति है_
_भावों को साकार करती,सुंदर इसकी भक्ति है_
_संस्कृत इसकी जननी है,उर्दू इसकी तनुजा_
_सदा सुहागिन रहेगी हिंदी क्योंकि इसके माथे पर लगी है बिंदी_
_वेद,उपनिषद,आगम सबका हिन्दी अनुवाद है_
_शास्त्रों के ज्ञाता यहां प्रकाण्ड पंडित विद्वान है_
_हिंदी केवल भाषा नहीं ये संस्कृति की खान है_
_तुलसी,कबीर,मीरा की वाणी और यहां हुए रसखान है_
_कोख कोख में कवि पले यहां यही इसका गुणगान है_
_किस किस के कितने नाम गिनाऊं, यहां हिंदी प्रेमीयों की खान है_
_विश्व के हर कोने में,अब इसकी आला पहचान है_
_भारत की आत्मा है हिंदी,यही हमारी जान है_
_ऐसी समृद्ध विरासत को कैसे न कहूं मित्रों हिंदी हिंद का मान है_
_✒️दिनेश दोशी_


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