आदिनाथ भगवान स्तवन (तर्ज:सौ बार जन्म लेंगै) नैनमलजी जैन चेन्नई



 युगादिकालके प्रथम राजेश्वर, प्रथम संयमधर और प्रथम तीर्थंकर श्री

ऋषभदेव भगवानका आज

जन्म कल्याणक एवं दीक्षा

कल्याणक हैं अतः प्रभुजी

के श्री चरणों में  भाव

पुष्प समर्पित हैं।



(तर्ज:सौ बार जन्म लेंगै)


आदिनाथ वचन तेरे

खुशियोंका खजाना है,

अनजान सफ़र भवका,

तुझसे ही सुहाना है,

            आदिनाथ 

तू सागर मैं कतरा,

नहीं पार तेरा पाया,

कर याद तेरे एहसां,

है आतम हरखाया 

बेचैन ये दिल मेरा,

बस तेरा दीवाना है,

           आदिनाथ -१.

बंजारोंकी बस्ती में,

पल भर के बसेरे हैं,

मंजिल है जुदा सबकी,

भवों के संग फेरे हैं,

चरणोंमें प्रभु तेरे,

बस मेरा ठिकाना है,

        आदिनाथ -२.

मेरे नाथ करम तेरा,

मुक्ति का इशारा है,

है नैन नूर तू ही,

सूर चांद सितारा है,

भक्ति में तेरी भगवन,

भय भव‌के भुलाना है,

          आदिनाथ -३.

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