व्यसनमुक्त समाज के निर्माण में महिलाओं का योगदान - DR DILEEP DHING CHENNAI
व्यसनमुक्त समाज के निर्माण में महिलाओं का योगदान
जनवरी-2023 के अंतिम सप्ताह में एक कार्यक्रम में सुपर स्टार रजनीकांत ने अपने
जीवन के बारे में एक प्रेरणादायक खुलासा किया था। उन्होंने कहा था कि उनकी पत्नी लता
ने उनको मांसाहार, मदिरापान और धूम्रपान छुड़वा दिए। फिल्मकार वायजी महेन्द्रन की फिल्म
चारुकेशी की घोषणा को लेकर आयोजित समारोह में तमिल सुपर स्टार ने महेन्द्रन को
धन्यवाद दिया कि उन्होंने ही लता जैसी सद्गुणी लड़की से परिचय और रिश्ता करवाया था ।
रजनीकांत ने अपने कंडक्टर जीवन को याद करते हुए कहा था कि वे रोज मांसाहार
करते थे, शराब पीते थे और न जाने कितनी सिगरेट पीते थे! और बाद में जब पैसा, शोहरत
और नाम मिला तो कितना भयानक संयोग बना होगा! परंतु वे साहस के साथ कहते हैं कि
उनकी पत्नी ने उनको मद्यमांस और धूम्रपान से मुक्त कर दिया। जनवरी-2023 में सुपरस्टार ने
कहा था कि वे 73 वर्ष के हैं और स्वस्थ हैं, उसका कारण उनकी पत्नी हैं। क्योंकि पत्नी ने ही
उनको व्यसनमुक्त बनाया। मशहूर हस्ती होने के बावजूद रजनीकांत द्वारा अपनी पिछली
कमियों को किसी सभा में जाहिर करना और उन कमियों को दूर करने का श्रेय अपनी पत्नी
को देना वाकई सबके लिए प्रेरणादायक है ।
महात्मा गांधी की माँ ने तो पानी से पहले ही पाल बांध ली थी। गांधीजी को जब विदेश
में पढ़ने जाना था तो उनकी माँ को चिंता हुई कि बेटा विदेश में कहीं बिगड़ नहीं जाए,
इसलिए उन्हें जैन मुनि बेचरजी स्वामी के पास ले गई और मदिरापान, मांसाहार तथा
परस्त्रीगमन नहीं करने की प्रतिज्ञा दिलवाई। गांधीजी अपनी आत्मकथा में लिखते हैं कि यदि
माँ उन्हें नियम नहीं करवाती तो वे भटक सकते थे। प्रसिद्ध फिल्म निर्माता संजय लीला भंसाली
के पिता व्यसन में पड़ गए थे। उनकी माँ ने परिवार को संभाला, बेटे को व्यसनमुक्त रखा और
आगे बढ़ाया। माँ के प्रति कृतज्ञता ज्ञापित करते हुए बेटे ने अपने 'मध्य नाम' के रूप में पिता
का नाम लगाने की बजाय माँ 'लीला' का ही नाम लगा दिया।
व्यसनमुक्ति अभियान के दौरान ऐसे अनेक व्यक्तियों से मेरा मिलना हुआ, जिन्होंने अपने
व्यसनमुक्त जीवन का श्रेय अपनी मां, बहिन, बेटी या पत्नी को दिया है। अनेक बहिनों ने अपने
भाइयों से व्यसनमुक्ति की राखी बंधवाई है। अनेक ललनाएँ नशामुक्ति की शर्त के साथ
परिणय सूत्र में बंधी है। अनेक बेटियों ने अपने जन्मदिन पर अपने पापा से 'नो ड्रिंकिंग' 'नो
स्मोकिंग का यादगार उपहार लिया है।
ऐसे अनेक परिवारों से मेरा संपर्क बना, जिनमें मद्यमांस को प्रायः निषिद्ध नहीं माना
जाता था। लेकिन उन घरों की साहसी महिला सदस्यों के अडिग संकल्प की वजह से उनका
चौका (किचन) कभी अपवित्र नहीं हुआ। उन्होंने कभी भी उनके चौके में मांस, मछली, अंडा
जैसी अपवित्र चीजों को प्रविष्ट नहीं होने दिया। तंबाकू, गुटका, बीड़ी, सिगरेट और नशीली
चीजों को घर के बाहर फेंक दिया।
अणुव्रत गौरव डॉ. महेन्द्र कर्णावट ने बताया कि राजस्थान में राजसमंद जिले के कुछ
गाँवों में सरकार को शराब के ठेके सिर्फ इसलिए बंद करने पड़े कि ग्रामीण महिलाओं ने
आंदोलन किया और ठेके के विरुद्ध मतदान किया। स्पष्ट है कि महिलाएँ अगर ठान लें तो
व्यसनमुक्ति अभियान बहुत तेजी से गतिमान हो सकता है।
सुबह का भूला जब शाम को घर आ जाता है तो उसे भूला नहीं कहते। जैन संत
इलंगो अडिलग द्वारा रचित तमिल के प्रथम महाकाव्य सिलप्पदिकारम् के नायक कोवलन को
जब अपनी भूल का अहसास हो जाता है, और वह भूल नहीं दोहराने का संकल्प करता है तब
महान नायिका कण्णगी अपने पति की भूल को एक पल में माफ कर देती है। घर की महिला
सदस्यों की प्रेरणा, आग्रह, डांट, उपालंभ या सीख के फलस्वरूप अनेक भूले-भटके पुरुष
सदस्य शाम को घर लौट आए। ऐसा करके उन्होंने अपने जीवन, परिवार और व्यवसाय को नई
दिशा दी। सुख, शांति, सुकून और सफलता का आनंदमय वातावरण बनाया ।
व्यक्ति, परिवार और समाज को व्यसनमुक्त रखने में महिलाओं की बहुत बड़ी भूमिका है,
तथा हो सकती है। परंतु आजकल सुनते हैं कि कुछ महिलाएँ भी व्यसन के चंगुल में फँस रही
हैं । इस चंगुल में फँसने वाली कुछ पढ़ी-लिखी महिलाएँ भी हैं। यदि ऐसा है तो यह अत्यंत
चिंताजनक स्थिति है ।
कहा जाता है कि एक महिला को शिक्षित करने का अर्थ है, पूरे परिवार को, पीढ़ियों को
शिक्षित करना। इसी तर्ज पर हम कह सकते हैं कि एक महिला को व्यसनमुक्त करने का अर्थ
है, पूरे परिवार और पीढ़ियों को व्यसनमुक्त करना। सिर्फ महिलाओं के जाग जाने से समाज में
बहुत बड़ा बदलाव किया जा सकता I
महिलाएँ मूलतः स्नेहिल और करुणावान होती हैं। वे प्रायः व्यसनों से दूर ही रहती आई
हैं। महिलाओं के व्यसनमुक्त रहने से परिवार और समाज को शक्ति मिली। संस्कारों और
सद्गुणों का रक्षण हुआ। फलतः महिला और पुरुष सभी; व्यसनमुक्त व खुशहाल समाज के
निर्माण में सहभागी बने ।
व्यसनमुक्ति से व्यक्ति स्वस्थ, परिवार सुखी, समाज सम्पन्न और देश मजबूत बनता है।
युवा पीढ़ी रचनात्मक बनती है। देश की प्रगति में युवा पीढ़ी की ऊर्जा का सही और पूरा
उपयोग होता है। व्यसनमुक्त समाज के निर्माण में महिलाओं का यह ऐसा महत्वपूर्ण योगदान है,
जिस पर अधिक ध्यान देकर अस्पताल और जेल में भीड़ को कम किया जा सकता है। देश के
विकास - रथ को अधिक गतिमान बनाया जा सकता है।
• डॉ. दिलीप धींग (साहित्य वारिधि )
(पूर्व निदेशक : अंतरराष्ट्रीय प्राकृत केन्द्र)
7. अय्या मुदली स्ट्रीट,
साहुकारपेट, चेन्नई–600001


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