निर्मल जैन को समर्पित कविता shivshakti market surat fire incident
आग ने चाहा, सपनों को मिटा दे,
मेहनत के फूलों को राख बना दे।
पर हिम्मत की दीवार गिरती नहीं,
शिवशक्ति की रौनक कभी मरती नहीं।
जो खो गया, वो फिर से बनेगा,
हर अंधेरा एक दिन छंटेगा।
लेकिन इस कठिन घड़ी में, जो साथ खड़े,
वही इंसान सच्ची मिसाल बने।
साकेत मार्केट के निर्मल जैन ने बढ़ाया हाथ,
संकट में बन गए उम्मीद की बात।
अपनी दुकानों को निशुल्क समर्पित कर दिया,
पीड़ित व्यापारियों का दुख हर लिया।
यह सेवा, यह समर्पण, यह भावना महान,
हर दिल में जलाएगी उम्मीद की जान।
जो जल गया, वो फिर खड़ा होगा,
हौसलों का सूरज फिर बड़ा होगा।
निर्मल जैन की राह पर और लोग भी चलेंगे,
साथ मिलकर नई दुनिया रचेंगे।
एक कदम उनका, सौ कदम दूसरे भी बढ़ाएंगे,
सहयोग से व्यापार फिर मुस्काएंगे।
जो दीप उन्होंने जलाया है,
हर मन में नया विश्वास आया है।
सहयोग की ये लहर अब थमेगी नहीं,
शिवशक्ति की रौनक कभी रुकेगी नहीं।

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