"सुधार की दुहाई, आचरण में ढिलाई" poetry


"सुधार की दुहाई, आचरण में ढिलाई"


 दुहाई देते है अक्सर हम,

सब समाज सुधार की मण भर


पर वेस्टर्न कल्चर के चलते,

अमल में नहीं ला पाते कण भर


मंदिर जाना,धार्मिक क्रिया,

तपस्या तो करते है बढ़ चढ़ कर


पर आडंबर,फिजूलखर्ची,    प्रतिस्पर्धा में पीछे नहीं हम रत्ती भर


खोखले ढुलमुल नियम बनाकर

बन गए हम सुधारक


ठीक से पालन नहीं हुआ,

कहां है हमारे नियामक


✍🏻दिनेश दोशी






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