भाव अशुभ शुभ हो पहले POETRY

 *भाव अशुभ शुभ हो पहले*


भाव अशुभ शुभ हो पहले, शुद्ध बने मन ऐसी आस। 

सच्चा धर्म करे जो पालन, समता रहती जिसके पास।।


ज्ञानी तब कहलाता कोई, जीवन में उतरे जब ज्ञान।

मात्र रटी हो जिसने पोथी, मिलता कैसे उसको मान।।

पानी पास पड़ा रहने से, मिट जाती क्या उससे प्यास।

सच्चा घर्म करे...।।


बैठे मंदिर मस्जिद जाकर, हो जाता क्या उससे धर्म।

व्यवहार नहीं जिसका वैसा, कैसे जाने वो फिर मर्म।।

कर्मठता से दूर खड़े जो, कैसे होती पूरी आस।

सच्चा धर्म करे...।।


ईर्ष्या-लोभ मिटे मन से जब, पा लेता है मनु सद्भाव।

चिंतक ही मन को फिर साधे,भरने लगते मन के घाव।।

क्रोध-अहं को जिसने छोड़ा, नित्य सजगता रहती खास।

सच्चा धर्म करे...।।


संत समागम अच्छा हो तब , शुभता आती अपने हाथ।

साँझ सवेरे करना चिंतन, साधें अपने मन को साथ।।

बुद्धि-विवेक के साथ चले जब,जीवन आता पूरा रास।

सच्चा धर्म करे...।।

मधु राजेन्द्र सिंघी, नागपुर (महाराष्ट्र)



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