संत उसी को मानिए poetry 3D news
विषय: संत उसी को मानिए
संत उसी को मानिए, जिसकी सुदेश सोच।
सरल तरल जीवन रहें, वाणी में हो लोच।१।
संत उसी को मानिए,
तप जप में हो लीन ।
करें आत्म कल्याण वो,
लेवे ज्ञान महीन।२।
संत उसी को मानिए, करता चिंतन ध्यान।
राग द्वेष से दूर रह,
अर्जित करता ज्ञान।३।
संत उसी को मानिए,
रहे क्रोध से दूर।
चाहे झेले प्रचुर वो,
परिषह कितने क्रूर।४।
संत उसी को मानिए,
कभी न करें विद्वेष।
नहीं बैर हो किसी से,
बहे करुणा अशेष।५।
स्वरचित: अशोक दोशी


टिप्पणियाँ
एक टिप्पणी भेजें