निज भाषा का अभिमान"
विषय: मातृ भाषा
विधा :दोहा
निज भाषा का अभिमान"
मेरे भारत देश पे,मुझको गर्व गुमान।
हिंदी भाषा निज निधी,उस पर है अभिमान।१।
हिंदी भाषा पर मुझे, है अति अधिक लगाव।
निज भाषा निज देश की, इसमें लिखता भाव।२।
चाव मुझे इसका रहा,निज भाषा पे नेह ।
हिंदी भाषा की कृपा, चलता मेरा देह ।३।
निज भाषा से प्रित मुझे, इसमें नहीं वहेम।
लिखना पढ़ना बोलना, हर दिन मेरा नेम।४।
निज भाषा निज देश की, रहना उससे नेह।
करो अंलकृत शब्द से, बहा भाव का मेह।५।
संजिवनी सुख दायिनी, मातृ भाषा सुदेश ।
रक्षण हो निज भेष का, बचना निज परिवेश।६।
समर्थ सक्षम निज वतन, मेरा हिंदुस्तान ।
मेरे भारत देश की,हिंदी से पहचान।७।
स्वरचित: अशोक दोशी

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