जयमंगल रेजिडेंसी में आचार्यश्री की निश्रा में श्रद्धा और भक्ति से ओतप्रोत संध्या भक्ति संपन्न



 परम श्रद्धेय आचार्य भगवंत यशोवर्म सूरीश्वर जी महाराजा, जिन्होंने गिरधर नगर जैन संघ में अपना यशस्वी चातुर्मास संपन्न किया था,  शंखेश्वर साम्राज्य में एक भव्य उपधान तप की आराधना संपन्न करवाने के पश्चात पुनः गिरधर नगर जैन संघ में एक दिवसीय प्रवास पर पधारे। उनके शुभ चरणों की पुनः आहट से संपूर्ण संघ में आनंद की लहर दौड़ गई। इस पावन अवसर पर धर्म की दिव्य गूंज ने श्रद्धालुओं को आध्यात्मिक चेतना से ओत-प्रोत कर दिया।

गाजते-वाजते, भव्य स्वागत यात्रा के साथ आचार्य भगवंत का संघ में प्रवेश हुआ।संघ की गलियां जयकारों से गुंजायमान हो उठीं और वातावरण धर्ममय बन गया। इस शुभागमन ने संघजनों के मन में एक नई ऊर्जा का संचार किया।



आचार्य भगवंत की निश्रा में नन्हे-मुन्ने उपधान तप आराधकों ने अपने अनुभवों को जब संघ के समक्ष प्रस्तुत किया, तो उनकी निष्कलंक भक्ति और दृढ़ तपशक्ति ने सभी का मन मोह लिया। बाल तपस्वियों की मासूम वाणी में समाहित आत्मशक्ति के अनुभवों ने संघजन को भावविभोर कर दिया और धर्म साधना के प्रति समर्पण की भावना को और भी प्रगाढ़ बना दिया।


गिरधर नगर जैन संघ में आचार्य भगवंत के आगमन ने धर्म और तप की महिमा को एक नई ऊंचाई प्रदान की। संघ द्वारा आयोजित इस आयोजन में श्रद्धालुओं की अपार भागीदारी रही, जहां हर कोई आत्मिक शांति और भक्ति रस में डूब गया। आचार्य भगवंत की दिव्य वाणी में निहित ज्ञान और संयम के संदेश ने उपस्थित जनसमूह के हृदय में धर्म साधना की लौ को और प्रखर कर दिया।



शाम को जयमंगल रेजिडेंसी स्थित भगवान महावीर स्वामी जिनालय में गुरु भगवंतों की पावन निश्रा में भव्य संध्या भक्ति का आयोजन हुआ। इस अवसर पर श्रद्धालु भक्ति रस में सराबोर होकर आध्यात्मिक आनंद की अनुभूति से अभिभूत हो उठे। संध्या भक्ति में गूंजते मंगलपाठ और भक्ति गीतों की स्वर लहरियों ने पूरे वातावरण को भक्तिमय कर दिया। आचार्य भगवंत अपने समस्त साधु भगवंतों के साथ आज रात्रि विश्राम जयमंगल रेजिडेंसी में करेंगे और कल प्रातः सोला रोड की ओर विहार करेंगे।


आचार्य भगवंत यशोवर्म सूरीश्वर जी महाराजा के इस दिव्य आगमन और भव्य आयोजन ने गिरधर नगर जैन संघ के इतिहास में एक स्वर्णिम अध्याय जोड़ दिया। संघजन ने उनकी पावन निश्रा में धर्म, तप और भक्ति का जो अनुभव किया, वह सदा के लिए उनके हृदय में अंकित रहेगा। इस पावन अवसर ने पूरे संघ को आत्मिक ऊर्जा और साधना के मार्ग पर अग्रसर होने की प्रेरणा दी, जिससे संपूर्ण वातावरण धर्ममय हो उठा।

टिप्पणियाँ

इस ब्लॉग से लोकप्रिय पोस्ट

अहमदाबाद में श्रीमती जेठीदेवी संकलेचा का निधन, नेत्रदान कर बनीं समाज के लिए प्रेरणा

नाहटा परिवार द्वारा आयोजित "रिषभ राज संघोत्सव" का शुभ मुहूर्त प्रदान

कर्णावती यूनिवर्सिटी में गढ़सिवाना की योगिता (देविका) जैन को गोल्ड मेडल

तेरापंथ युवक परिषद, अहमदाबाद की वार्षिक सभा हुई सम्पन्न,प्रदीप बागरेचा बने नए अध्यक्ष

भाव अशुभ शुभ हो पहले POETRY

मिलावट के खिलाफ जागरूकता की जरूरत :- अशोक बाफना

अग्रवाल समाज का ऐतिहासिक प्रोजेक्ट: मदुरै स्थित तथनेरी देवभूमि (श्मशान गृह) में वेटिंग हॉल का उद्घाटन 10 मार्च को

राजभवन में हुआ PYS का 212वां सेशन — आचार्य श्री उदय वल्लभ सूरिश्वरजी म.सा. ने दी “ब्लैक बॉक्स” के ज़रिए खुद को समझने की सीख

पत्नी की याद में समर्पण की मिसाल: चूरू के व्यापारी निर्मल सेठिया ने यूके में रचा इतिहास

धर्म जड़ नहीं, एक प्रवाह है- आचार्य श्री उदय वल्लभ सूरीजी म.सा. का गिरधर नगर में प्रेरणादायक प्रवचन