आप स्वयं का साथ चाहिए,
आप स्वयं का साथ चाहिए,
पैसा इज्जत नाम और शोहरत, ऊंचा ओहदा अच्छी सोहबत,
नार हंसी हो घर हो अच्छा, हमसे प्यार करे सब सच्चा,
कभी न उलझन जीवन में हो,
बस सुलझे हालात चाहिए,
आप स्वयं का साथ चाहिए,
आप स्वयं का साथ चाहिए,
1. सूत्र प्रथम है प्रसन्नता का,सोच हमारी सार्वजनिक हो,
अपने कारण नहीं दुखे दिल कोई अपना हो पथिक हो,
खुश रहने का सबके दिल में, एक अदद जज्बात चाहिए,
आप सभी का साथ चाहिए,
आप स्वयं का साथ चाहिए,
2. छोटा सा है नियम दूसरा चाह नहीं हो हद से ज्यादा,
जितनी चादर पांव पसारो अतिक्रमण कर करो ना वादा,
अपने अधिकारों में खुश हो, संतुष्टि अभिजात चाहिए,
आप स्वयं का साथ चाहिए,
आप स्वयं का साथ चाहिए।
3. नियम तीसरा मेहनत हिम्मत,दूर दृष्टि और अनुशासन का,
कार्य हुए सब प्रामाणिकता से,आध्यात्मिक जीवन यापन का,
लौकिक जिम्मेदारी के संग, धर्म ध्यान सौगात चाहि…
विमल पीतलिया,
27.12.1964,
B.Sc., L.L.B., D.L.L.
पता,
"MATUKRITI"
112/5th cross,
Manasara Road,
Ittigegud,
MUSORE,
570010.
9844511361,
vimalpitliya@yahoo.in

बहुत सुंदर सृजन आपका
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