अलौकिक जगत की छटा
जीवन का यथार्थ
शब्द :अलौकिक जगत
विधा :दोहा
छटा अलौकिक प्रकृति की,विस्मित हैं हम देख
गजब रचा किसने इसे ,सृजित किया आरेख ।१।
जगत अलौकिक जान ले,जानें इसके भेद।
कोई सुख से जी रहा, किसी अंग में खेद ।२।
जान कर्म के भेद को,जान जगत जंजाल।
आत्म अलौकिक ज्ञान से,निज को तूं संभाल।३।
स्वरचित: अशोक दोशी


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