आग का कहर: सूरत के टेक्सटाइल मार्केट में करोड़ों का नुकसान, व्यापारियों के सपने जलकर राख SHIVSHAKTI MARKET SURAT FIRE
सूरत: शिवशक्ति टेक्सटाइल मार्केट में भीषण आग, 13 घंटे बाद भी बेकाबू – व्यापारियों की मेहनत जलकर हुई राख
सूरत का शिवशक्ति टेक्सटाइल मार्केट आज विनाश की भयानक तस्वीर पेश कर रहा है। इस मार्केट में लगी भीषण आग पर 13 घंटे से अधिक समय बीतने के बाद भी काबू नहीं पाया जा सका है। आग की भयावहता इतनी है कि सूरत समेत आसपास के कई शहरों की फायर ब्रिगेड टीमें राहत कार्य में जुटी हैं। शहर के विभिन्न फायर स्टेशनों से विशेषज्ञ बुलाकर आग बुझाने के प्रयास किए जा रहे हैं, लेकिन अब तक स्थिति नियंत्रण से बाहर है।
इस मार्केट में लगभग 853 दुकानें हैं, जिनमें से अधिकांश दुकानों में रखा करोड़ों का सामान जलकर राख हो गया है। वर्षों की मेहनत और सपनों को अपनी आंखों के सामने जलते हुए देख व्यापारियों की आंखों से आंसू थमने का नाम नहीं ले रहे। कोई अपने परिवार की रोजी-रोटी के लिए चिंतित है, तो कोई अपने जीवनभर की पूंजी के स्वाहा होने से सदमे में है। जिन दुकानों में कभी कारोबार की रौनक थी, आज वहां केवल राख और सन्नाटा पसरा है।
व्यापारियों का दर्द इस हादसे में साफ झलकता है। कई लोगों ने अपनी पूरी जिंदगी की कमाई इस बाजार में लगा दी थी। एक व्यापारी की आंखों में आंसू छलक पड़े जब उसने कहा, "हमने अपने खून-पसीने से यह व्यापार खड़ा किया था। अब समझ नहीं आ रहा कि इस नुकसान की भरपाई कैसे करेंगे। कर्ज लेकर कारोबार शुरू किया था, अब सबकुछ खत्म हो गया।"
फायर ब्रिगेड के अधिकारियों ने बताया कि मंगलवार को लगी आग पर काबू पाने के 12 घंटे बाद बुधवार सुबह दोबारा आग भड़क उठी। इमारत की पहली और दूसरी मंजिल पर स्थित सभी दुकानों में कूलिंग की प्रक्रिया पूरी की जा चुकी है, लेकिन तीसरी और चौथी मंजिल पर बार-बार उठ रही आग की लपटें राहत कार्य में बाधा बन रही हैं। आग पर काबू पाने के लिए 31 टीमें और 200 से अधिक फायर ब्रिगेड कर्मी दिन-रात जुटे हुए हैं। इमारत में कई तरह के ज्वलनशील पदार्थ होने के कारण आग तेजी से फैल रही है। दमकलकर्मी अपनी जान जोखिम में डालकर आग बुझाने की कोशिश कर रहे हैं, लेकिन अब तक सफलता नहीं मिली है।
इस हादसे ने न सिर्फ व्यापारियों की आर्थिक रीढ़ तोड़ दी है, बल्कि उनके भविष्य को भी अनिश्चितता के अंधेरे में धकेल दिया है। आग की चपेट में आई दुकानें केवल व्यापार का केंद्र नहीं थीं, बल्कि कई परिवारों की आजीविका का सहारा भी थीं। इस भीषण अग्निकांड ने व्यापारियों को गहरे संकट में डाल दिया है।
इस त्रासदी ने एक बार फिर सुरक्षा उपायों पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। व्यापारियों का कहना है कि बाजार में फायर सेफ्टी की उचित व्यवस्था होती तो शायद इतना बड़ा नुकसान नहीं होता। कई लोगों ने सरकार से तत्काल राहत पैकेज की मांग की है ताकि वे इस संकट से उबर सकें।
सूरत का शिवशक्ति टेक्सटाइल मार्केट आज जलता हुआ एक सवाल पूछ रहा है—क्या व्यापारियों की मेहनत और सपनों की सुरक्षा के लिए कोई ठोस कदम उठाए जाएंगे, या फिर ऐसी त्रासदियों के बाद केवल आश्वासन ही दिए जाएंगे?

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